Monday, 17 September 2018

THE INCREADEBLE LOVE STORY

:---- अचानक 1 लड़का दरवाजा खोलते हुए जान बचा के भागता है |
Then show flash back i.e. now its look like ……   लड़की भीगी- भागी सी रहो में चलती (चलता) जा रही थी तभी उसकी (उसका) पार्स + रुमाल गिर जाता है और उसे पता भी नही चलता है|  जिसमे उसकी (उसका) कुछ तस्वीरें, कार्ड्स तथा जरुरी documents  रहता है with address.. जो  लड़के को मिलता है | जब लड़का अपना घर जा के , उस पार्स को खोलतें ही तस्वीर जमीं  पे गिर जाता है| और तस्वीर को देखते ही देखते ही लड़का ख्यालों में खो जाता है | ख्यालों में ही (लड़का लड़की के पास जाता है उसे उसका सामान देता है, और दोनों 1 दुसरे के आँखों में देखने लगता है love story beginning और भी मुलाकातें होती है फिर लड़का लड़की कि आँखों में खो जाता है तभी उसका दोस्त उसे हिलाता है जब वो नही उठता है तब वो उसे लात मरता है और कहता है भाई तू अभी तक जिंदा है मुझे लगा तेरी लाश पारी है इसीलिए मैं अपना ख्वाइस पूरी कर रहा था ) | शाम में लड़का दिए हुए address पर जाता है और वहां उस लड़की को देखते ही मुस्कुराता है तभी लड़की लड़के का हाँथ सहलाता है वो भी हवस कि निगाहों से तो लड़का को भी अच्छा लगता है और वो खुश हो जाता है ख़ुशी क मारे फुलें नहीं समाता है तभी “**लड़की बोलती (बोलता) है जानू तुम बैठो मैं हम दोनों के लिए coffee लाती (लाता) हूँ” तभी लड़का अचानक दरवाजा खुलते ही गिरते परते भागता है |  
Note :-- “ ** means ” वास्तव में वो लड़की नही रहती है वो 1 गे रहता है जब वो बोलती (बोलता ) है तब आवाज सुन कर ही लड़का भागता है | लेकिन लड़का के ख्यालों में हकीकत ही 1 लडकी रहती है |              for any query contact….


email: -- swarnakarbittu1998@gmail.com


writter :-- Bittu soni

mob :-- 08239401810


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                        at first contact me 

"सिगरेट पिता हूँ मैं"

                        सिगरेट पिता हूँ मैं


तेरे जाने के बाद भी जीता हूँ मैं,

हाँ अब सिगरेट पिता हूँ मैं |

ऐसे तो धुआं मीठी नहीं होती है ,

हाँ लेकिन तेरी कड़वी यादों को उड़ने के लिए पिता हूँ मैं |

हाँ अब सिगरेट पिता हूँ मैं |

अपनी बेचैनी को हवा में उदा देता हूँ ,

और लोग कहते है, मैं सिगरेट बहुत पिता हूँ |

तुझे हर पल याद करता हूँ मैं ,

हाँ अब सिगरेट पिता हूँ मैं |


                          :- बिट्टू सोनी

Wednesday, 22 August 2018

Dastan-a-Dil

                                   
       दास्ताँ-ए-दिल

तेरे इश्क मे दिल टुटा है न जाने तकदीर किस तरह मुझसे रूठा है ,
अजीब सा हाल है इन दिनों तबियत का ख़ुशी ख़ुशी नहीं और दर्द बुरा नही लगता है|
बन गया बंजारा तेरे बाद, न अब होश है किधर जाऊंगा,
बस तेरे याद में जीता हूँ और दर्द-ए-गम को पिता हूँ,
अब जख्मो को अपने सीता हूँ ,न जाने किस तरह सहता हूँ |
बस चाह थी एक हमसफर कि मुझे,
तुम ने दिया धोखा और मैं उसी राह में लड़खड़ा के चलता रहा ,
न मिला साथ तेरी न मिली वफाये तेरी,
बस मिली याद तेरी और इसके सहारे जीता रहा |
अब तो एक पल में हज़ार दफा देखते है तस्वीर तुम्हारी लेकिन तुम्हे खबर होती नही ,
अभी भी है दिल को उम्मीद तुम्हारी पर ए उम्मीद भी खत्म होती नही |


 रचनाकर :- बिट्टू सोनी

Wednesday, 23 May 2018

बीते लम्हे short story2

                      बीते लम्हे



लम्हे जुदाई को बेकरार करते है हालत मेरे मुझे लाचार करते है ,
कोई न मिला ऐसा जिस पर दुनिया लुटा देते ,
सबने दिया धोखा किस-किस को भुला देते |
दिल का दर्द दिल में ही दबाये रखे है ,
बयां किया होता तो महफ़िल को रुला देते |
बस यादों के सहारे जीता गया दर्द-ए-गम को पिता गया ,
जख्मो को अपने सीता गया |
चाह थी एक हमसफर कि मुझे ,
तुमने दिया धोखा और फिर भी मैं लड़खड़ा के चलता गया |
न साथ मिला तेरा न मिली तेरी वफाए बस मिली चंद यादें और इसके सहारे मैं जीता गया | 


                  composed by :- Bittu soni

Sunday, 6 May 2018

बीते लम्हे SHORT STORY

                          बीते लम्हे 




जो पुरानी यादों में जिंदगी ढूंढा करते है उन्हें सिर्फ दो पल कि मुश्कुराहट ही नसीब होती है, और फिर उम्र भर कि तन्हाई एक ऐसी तन्हाई जहाँ हम भरी महफ़िल में भी अकेले हो जाते है, और अधुरापन भी हमे पूरा लगने लगता है, एक ऐसी मनहूसियत दिल पे छा जाती है जो चाहे भी तो मिट नही पाती है, और वो यादें भुलाये भी भुला नहीं पातें है, रह रह के जिस्म में गड़े कांटे कि तरह दर्द दिए जाते है / और हम हंस हंस के टाल दिया करते है, क्यूंकि शायद मुकद्दर को यही मंजूर था, क्या सिकवा हम किसी और से करे जब मंजिल ही हमसे रूठ गयी हो, जो नायब तौफा खुदा से मिली थी वो हांथों से यूँ छुटी कि टूट के बिखरी और किनारे पे जा गिरी और कस्ती हमारी डूब गयी |







                                        By :- बिट्टू सोनी 

Sunday, 29 April 2018

Tanhai

                     तन्हाई

जिंदगी की राह में तन्हाई मैंने पा लिया जिनका भी गम मिला अपना बना लिया,  सुनाने को मिला न कोई दास्ताँ-ए-गम,आईना रखा सामने और खुद को सुना दिया |

कैसे मनाऊँ तेरी रुसवाई को कैसे समझाऊं अपनी तन्हाई को, कि तू जा चुकी है यूँ छोड़ के मुझको, कि तन्हाई भी अब मेरी मुझे चिढाती है कि जिससे थी इतनी मोहब्बत तुझको वही बना गया है तेरा यार मुझको |

वो भी क्या दिन थे क्या थी रातें ,होती थी कितनी बातें होती थी कितनी मुलाकातें ना किसी चीज़ का परवाह था ना किसी का डर,रंगीन होती थी शामें चहकता था सुभह, अब ना वो वक़्त रहा ना वो माहोल अब किस्से गुफ्तगुं करू ए मेरी तन्हाई |



                              

                      रचनाकार :- बिट्टू सोनी

 

Sunday, 18 March 2018

FRIENDSHIP

                                              THE PIVOTAL

                        Friendship                           




The considerable bestowal of life is friendship.
Friends are corporal, they are always tries to see you laughing. They are not afraid to help you avoid mistakes and who is always wants to show you flying. But they pitch a friendship that will last of lifetime. Other friends may not have such loving. This type of friends is one of in a million, one that fell you deep inside. Friendship gives strength to move forward, you have offered your hand to hold on, when times are tough. We know that to provide support us, god is created it. I believe friends are sent from god above because he know the strength of friendship. Friends are show that love in so many ways, the pain caused by a failed friendship may detriment your life. So I pray to god, friends never apart from a friends. So for that, I write this poem for all friends and tell them from heart,”THANK YOU”

                                                         Composed by :- BITTU SONI

thepivotal

                                                 

Sunday, 11 March 2018

           THE PIVOTAL

        दुशमन ज़माना     


ज़माने को भूल कर जिओ ज़माना तुम्हे नकारती है |
इसीलिए , निगाहे किसी से दो चार कर लो, खुद से ज्यादा किसी पे इतबार कर लो| क्या पता जिंदगी में कल क्या हो, चल अब लम्हों से प्यार कर लो | दास्ताँ ज़माने की क्या बताऊँ दोस्तों | कदम दो चार चलता हूँ मुकद्दर रूठ जाता है , हर एक उम्मीद से रिश्ता टूट जाता है, ज़माने को सम्भालू गर तो उनसे दूर होता हूँ, उनका दामन सम्भालू तो ज़माना छूट जाता है | बस यूँ ही कट रही जिन्दगानी है | ना जाने कैसा दर्द है दिल मे भरा , ना रो सकता हूँ ,ना हंस सकता हूँ | क्या बताऊँ ज़माने की बेरुखी दोस्तों , दर्द पे हंसती है , और ख़ुशी पे मचलती है |गर हो जाए तुमको प्यार किसी से , तों ज़माना तुझपे हंसती है | पर ज़माने को कौन समझाए , मोहब्बत से ही दुनिया बस्ती है | ज़माने की खातिर खुद को भुला बैठा और इंतजार करता रहा मौत का , पर मौत की रुसवाई तों देखो यारों , ज़माने की डर से मेरे पास न आया | अब तों मैंने भी सोच ली , कुछ ऐसा कर जाऊं कि मौत भी चौंखट पे बैठे मेरा इंतजार करे   और मैं नज़र ना आऊँ | कैसा अजीब ज़माना है किस ने इसको जाना है, दिल तों जीता है मोहब्बत की सहरो से, बिन मोहब्बत के कहाँ है इसका ठिकाना| ज़माने की खातिर उनसे जुदा हूँ ,क्या बताऊँ किस कदर उनपे फ़िदा हूँ|  बस ज़माने को अब बताना है , दर्द में जी के दिखाना है |

                                                रचनाकार :- बिट्टू सोनी

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