Tuesday, 26 February 2019

अब तुम ही हो

                  अब तुम  ही हो



अगर मैं हूँ मुसाफिर तो मेरी मंजिल हो तुम,
मैं हूँ खोया तो मेरी हांसिल हो तुम,
मैं हूँ दवा तो मेरी दुआ हो तुम,
हूँ मैं सजा तो मेरी मज़ा तो तुम,
हूँ मैं साज़ तो मेरी ग़ज़ल हो तुम,
हूँ मैं गीत तो मेरी संगीत हो तुम ,
हूँ मैं चाँद तो मेरी चाँदनी हो तुम, 
हो मेरी सांसो में तुम मेरी ख़्वाबो में तुम,
हूँ मैं खुशबू तो  मेरी हवा तो तुम,
हूँ मैं बिगड़ा तो मेरी बनती बात हो तुम,
रात की आखरी पहर मांगी जो वो दुआ हो तुम ,
अब तो मेरी सुबह और शाम  में हो तुम,
बस अब तो मेरा सारा जहां हो तुम।
By:-Bittu soni

"माँ"

क्या बताऊं कैसी है माँ, धरती पे भगवान जैसी है माँ । हर दर्द को सहती है, पर जुबां से कुछ नही कहती है, सारे दुखरे को खुद में स...